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Shri Ram Katha | क्यों आया था भगवान श्री राम को क्रोध?

Shri Ram Katha :

भगवान विष्णु के सातवें अवतार श्री राम को गंभीर, शांतचित्त, सहिष्णु और धैर्यवान माना जाता है। पर एक समय उन्हें क्रोधित होना पड़ा।

लंकापति राजा रावण ने माता सीता का हरण कर उन्हें बंदी बना रखा था तब श्रीराम ने उन्हें छुड़ाने लंका की और प्रस्थान किया।

लेकिन रास्ते में एक विशाल समुद्र था जिसे पार करने का कोई जरिया हासिल नहीं हो रहा था। तब श्री राम ने समुद्र से अपनी लहरों को शांत कर देने का अनुरोध किया ताकि उस पर सेतु का निर्माण किया जा सके।

इधर तीन दिन बीत गए, किंतु जड़ समुद्र विनय नहीं मानता। तब श्री राम जी क्रोध सहित बोले-

बिना भय के प्रीति नहीं होती!॥
हे लक्ष्मण! धनुष-बाण लाओ, मैं अग्निबाण से समुद्र को सोख डालूँ। मूर्ख से विनय, कुटिल के साथ प्रीति, स्वाभाविक ही कंजूस से सुंदर नीति (उदारता का उपदेश),॥1॥

ममता में फँसे हुए मनुष्य से ज्ञान की कथा, अत्यंत लोभी से वैराग्य का वर्णन, क्रोधी से शम (शांति) की बात और कामी से भगवान्‌ की कथा, इनका वैसा ही फल होता है जैसा ऊसर में बीज बोने से होता है (अर्थात्‌ ऊसर में बीज बोने की भाँति यह सब व्यर्थ जाता है)॥2॥

(Shri ram charitra manas / श्रीरामचरितमानस – सुंदर काण्ड / Sundar Kand)

ऐसा कहकर श्री रघुनाथजी ने धनुष चढ़ाया। 

समुद्र ने भयभीत होकर प्रभु के चरण पकड़कर कहा- हे नाथ! मेरे सब अवगुण (दोष) क्षमा कीजिए। हे नाथ! आकाश, वायु, अग्नि, जल और पृथ्वी- इन सबकी करनी स्वभाव से ही जड़ है॥

समुद्र के अत्यंत विनीत वचन सुनकर कृपालु श्री रामजी ने समुद्र को क्षमा कर दिया। 

श्री राम के क्रोध का क्या है अर्थ
प्रभु श्री राम क्रोधित हुए उसके पीछे कोई न कोई बहुत बड़ा कारण अवश्य रहा। मर्यादापुरुषोत्तम ने धर्म और कर्तव्य पालन के दौरान बाधा आने पर ही क्रोध प्रकट किया। इसका आशय यही है कि धर्म स्थापना व कर्तव्य पालन में आने वाली बाधा सर्वथा अस्वीकार्य है।

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