Maa Siddhidatri: करियर में सफलता हासिल करने के लिए माता की उपासना करें इस तरह

Maa-Siddhidatri

Maa Siddhidatri ke swarup ko jarur padhein

माँ सिद्धिदात्री को प्रसन्न करने हेतु इस मंत्र का जाप करें: ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः
बीज मंत्र: ह्रीं क्लीं ऐं सिद्धये नम:

प्रार्थना
सिद्ध गन्धर्व यक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि। 
सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥

माँ दुर्गाजी की नौवीं शक्ति का नाम सिद्धिदात्री हैं। ये सभी प्रकार की सिद्धियों को देने वाली हैं। नवरात्र-पूजन के नौवें दिन इनकी उपासना की जाती है।

देवीपुराण के अनुसार भगवान शिव ने इनकी कृपा से ही सिद्धियों को प्राप्त किया था। इनकी अनुकम्पा से ही भगवान शिव का आधा शरीर देवी का हुआ था। इसी कारण वे लोक में ‘अर्द्धनारीश्वर’ नाम से प्रसिद्ध हुए।

माँ सिद्धिदात्री चार भुजाओं वाली हैं। इनका वाहन सिंह है। ये कमल पुष्प पर भी आसीन होती हैं। इनकी दाहिनी तरफ के नीचे वाले हाथ में कमलपुष्प है।

प्रत्येक मनुष्य का यह कर्तव्य है कि वह माँ सिद्धिदात्री की कृपा प्राप्त करने का निरंतर प्रयत्न करे।

इस दिन शास्त्रीय विधि-विधान और पूर्ण निष्ठा के साथ साधना करने वाले साधक को सभी सिद्धियों की प्राप्ति हो जाती है। ब्रह्मांड पर पूर्ण विजय प्राप्त करने का सामर्थ्य उसमें आ जाता है।

माँ को हलवा, खीर, पूड़ी का भोग लगाएं और मयूर हरे (peacock green) रंग के कपड़े पहने कार्यों में सफलता प्राप्त होगी।

महानवमी 
6 अक्टूबर सुबह 10:56 बजे से महानवमी आरम्भ
अक्टूबर 12:38 PM तक महानवमी

अगर आप चाहते हैं कि आप अपने करियर में सफलता हासिल करें और आपको हर क्षेत्र में कामयाबी मिले तो नवमी की रात 12 बजे अपने घर के मुख्य दरवाज़े पर शुद्ध घी का दीपक अवश्य जलाएं।

नवरात्री के नौ दिनों में आपसे पूजा करने में गलती हो गयी हो तो माता से क्षमा प्रार्थना जरूर करें

Maa Siddhidatri Kavach- माँ सिद्धिदात्री कवच
ॐकारः पातु शीर्षो माँ, ऐं बीजम् माँ हृदयो। 
हीं बीजम् सदापातु नभो गृहो च पादयो॥ 
ललाट कर्णो श्रीं बीजम् पातु क्लीं बीजम् माँ नेत्रम्‌ घ्राणो। 
कपोल चिबुको हसौ पातु जगत्प्रसूत्यै माँ सर्ववदनो॥

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