Maa Mahagauri : आर्थिक संकट दूर करने के लिए करें माँ महागौरी की उपासना

Maa Mahagauri -आर्थिक संकट दूर करने के लिए करें माँ महागौरी की उपासना

Maa Mahagauri ke swarup ko jarur padhein

दुर्गापूजा के आठवें दिन महागौरी की उपासना का विधान है।

प्रार्थना
श्वेते वृषे समारूढा श्वेताम्बरधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा॥

माँ गौरी को प्रसन्न करने हेतु इस मंत्र का जाप करें: ॐ देवी महागौर्यै नमः
बीज मंत्र: श्रीं क्लीं ह्रीं वरदायै नम:

माँ दुर्गाजी की आठवीं शक्ति का नाम महागौरी है।देवी का रंग गौर होने के कारण इनका नाम महागौरी पड़ा।

इस गौरता की उपमा शंख, चंद्र और कुंद के फूल से दी गई है। इनकी आयु आठ वर्ष की मानी गई है- ‘अष्टवर्षा भवेद् गौरी।’ इनके समस्त वस्त्र एवं आभूषण आदि भी श्वेत हैं।

महागौरी की चार भुजाएँ हैं। इनका वाहन वृषभ है। इनके ऊपर के दाहिने हाथ में अभय मुद्रा और नीचे वाले दाहिने हाथ में त्रिशूल है। ऊपरवाले बाएँ हाथ में डमरू और नीचे के बाएँ हाथ में वर-मुद्रा हैं। इनकी मुद्रा अत्यंत शांत है।

इनकी शक्ति अमोघ और सद्यः फलदायिनी है। इनकी उपासना से भक्तों के सभी कल्मष धुल जाते हैं, पूर्वसंचित पाप भी विनष्ट हो जाते हैं।

भविष्य में पाप-संताप, दैन्य-दुःख उसके पास कभी नहीं जाते। वह सभी प्रकार से पवित्र और अक्षय पुण्यों का अधिकारी हो जाता है।

माँ को नारियल का भोग लगाएं। बैंगनी (Purple) रंग के कपड़े पहने ऐसा करने से माँ की विशेष कृपा प्राप्त होगी।

महाअष्टमी का शुभ मुहूर्त
5 अक्टूबर सुबह 09:53 बजे से अष्टमी आरम्भ
6 अक्टूबर सुबह 10:56 बजे तक अष्टमी
संध्या पूजा मुहूर्त- सुबह 10:30 बजे से 11:18 बजे तक

जरूरत के समय धन नहीं रहता, दुर्गा अष्टमी पर अवश्य करें ये उपाय-
महागौरी के स्वरूप को दूध से भरी कटोरी में विराजित कर चांदी का सिक्का चढ़ाएं। फिर सिक्के को धोकर हमेशा अपनी जेब में रखें।

दुर्गाष्टमी और नवमी के दिन कन्या पूजन का बड़ा महत्व है, इस दिन कन्याओं को नौ देवी का रूप मानकर उन्हें पूजा जाता है तथा भोजन कराया जाता है। ऐसा माना जाता है कि देवी जब अपने लोक जाती हैं तो उन्हें घर की कन्या की तरह ही बिदा किया जाना चाहिए।

Maa Mahagauri kavach | महागौरी कवच
ॐकारः पातु शीर्षो माँ, हीं बीजम् माँ, हृदयो।
क्लीं बीजम् सदापातु नभो गृहो च पादयो॥
ललाटम् कर्णो हुं बीजम् पातु महागौरी माँ नेत्रम्‌ घ्राणो।
कपोत चिबुको फट् पातु स्वाहा माँ सर्ववदनो॥

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