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नवरात्री 2019

Maa Kushmanda : उन्नति चाहनेवालों को इनकी उपासना करनी चाहिये

Maa kushmanda ke swarup ko jarur padhein

Maa Kushmanda की उपासना से भक्तों के समस्त रोग-शोक विनष्ट हो जाते हैं तथा आयु, यश, बल और आरोग्य की वृद्धि होती है।

प्रार्थना
सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च।
दधाना हस्तपदमाभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे॥

माँ कूष्माण्डा को प्रसन्न करने हेतु इस मंत्र का जाप करें – ॐ एम ह्रीं क्लीं कूष्माण्डायै नमः
बीज मंत्र:
कूष्मांडा : ऐं ह्री देव्यै नम:


Maa Kushmanda swarup Arambh | माँ कूष्मांडा स्वरुप आरम्भ

माँ दुर्गाजीके चौथे स्वरूपका नाम कूष्माण्डा है इनका निवास सूर्यमण्डल के भीतर के लोक में है।

जब सृष्टि का अस्तित्व नहीं था, चारों ओर अन्धकार-ही-अन्धकार परिव्याप्त था, तब इन्हीं देवी ने अपने ‘ईषत्‌’ हास्य से ब्रह्माण्ड की रचना की थी। अत: यही सृष्टि की आदि शक्ति हैं।

इनके पूर्व ब्रह्माण्ड का अस्तित्व था ही नहीं। ब्रह्माण्ड को उत्पन्न करने के कारण इन्हें कूष्माण्डा देवी के नामसे अभिहित किया गया है।

इनकी आठ भुजाएँ हैं। अतः ये अष्टभुजा देवीके नाम से भी विख्यात हैं। इनके सात हाथों में क्रमश: कमण्डलु, धनुष, बाण, कमल-पुष्प, अमृतपूर्ण कलश, चक्र तथा गदा है। आठवें हाथ में सभी सिद्धियों और निधियोंको देनेवाली जपमाला है। इनका वाहन सिंह है।

नवरात्र-पूजनके चौथे दिन कूष्माण्डा देवी के स्वरूप की ही उपासना की जाती है। इस दिन साधक का मन ‘अनाहत’ चक्रमें अवस्थित होता है।

अत: इस दिन उसे अत्यन्त पवित्र और अचञ्चल मन से कूष्माण्डा देवी के स्वरूप को ध्यान में रखकर पूजा-उपासना के कार्य में लगना चाहिये।

माँ कूष्माण्डा की उपासना मनुष्य को आधियों-व्याधियों से सर्वथा विमुक्त करके उसे सुख, समृद्धि और उन्नति की ओर ले जाने वाली हैं। अत: अपनी लौकिक-पारलौकिक उन्नति चाहनेवालों को इनकी उपासना में सदैव तत्पर रहना चाहिये।

मालपुआ का नैवेद्य इस दिन अर्पण करें, रॉयल ब्लू रंग के कपड़े पहने ऐसा करने से आरोग्य सुख में वृद्धि होगी होगी। 

ऐसा माना जाता की नवरात्रि में रंगों का बहुत महत्व है इसलिए ऎसे कपड़ों का चयन करना चाहिए जो माता को प्रिय हैं।

Maa Kushmanda Kavach- माँ कूष्माण्डा कवच

हंसरै में शिर पातु कूष्माण्डे भवनाशिनीम्।
हसलकरीं नेत्रेच, हसरौश्च ललाटकम्॥
कौमारी पातु सर्वगात्रे, वाराही उत्तरे तथा, 
पूर्वे पातु वैष्णवी इन्द्राणी दक्षिणे मम।
दिग्विदिक्षु सर्वत्रेव कूं बीजम् सर्वदावतु॥

माँ दुर्गा आप सब की मनोकामनाएं पूरी करे। जय माता दी। 

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