Kanya Puja Vidhi, time, date, Navrati 2019

Kanya-puja

Kanya Puja Vidhi

देवीपूजन में कुमारी प्रत्यक्ष देवी मानी गयी है अत: भोजन, वस्त्र, आभूषण आदि से कुमारी-की पूजा प्राचीन काल से की जाती रही है। नवरात्र पर्व के दौरान कन्या पूजन का बड़ा महत्व है,  दुर्गाष्टमी और नवमी के दिन कन्याओं को नौ देवी का रूप मानकर उन्हें पूजा जाता है तथा भोजन कराया जाता है।

देवी पुराण के अनुसार कन्याओं को दुर्गाष्टमी, नवमी के दिन भोजन कराना सर्वश्रेष्ठ माना गया है। यहाँ जिज्ञासु जनों के लिए कन्‍या-पूजन का शास्त्रीय-विधान दिया जा रहा है। 

कुमारिका- पूजन विधि।

ब्रह्मा जी द्वारा कुमारिका-पूजन के विधान का वर्णन देवी-पुराण में प्रस्तुत किया जाता है। जो इस प्रकार है –

“ब्रह्मा जी बोले :- 

“हे देवराज इंद्रा! दान एवं जप से उस प्रकार देवी सन्तुष्ट नहीं होतीं हैं जिस प्रकार कुमारी-भोजन से संतुष्ट होतीं हैं। जिसने कुमारियों का पूजन-कृत्य सम्पन्न किया उसने पितर, वसु, रुद्र, आदित्य एवं लोकपालगण इन सबों का पूजन-कृत्य सम्पन्न कर लिया। विशेष रूप से शुक्ल-पक्ष की अष्टमी, एवं नवमी तिथियों में कुमारिकाओं को भोजन कराना चाहिए”।

“हे इन्द्र! मै पूजन विधि बतलाता हूँ इसे ध्यान से सुनो –

“सर्वप्रथम सभी कुमारियों का पाद-प्रक्षालन सम्पन्न करना चाहिए। तत्पश्चात्‌ गोमय से भलीभाँति उपलिप्त सुन्दर स्थानपर जहाँ वे बैठी रहतीं हैं वहाँ गन्ध, पुष्प एवं मनोहर मालाओं से उनका पूजन किया जाना चाहिए। विधिविहित रीति से उनके पूजन-कृत्य के सम्पन्न हो जाने के अनन्तर उन्हें भोजन प्रदान करना चाहिए।

घृत(देसी घी) से बने लडडू एवं मधु मिश्रित क्षीर तथा श्रद्धा अनुसार भोजन प्रदान करना चाहिए तथा उन्हें धीरे-धीरे भोजन कराना चाहिए।

उनके द्वारा मांगें जाने पर उन्हें जल तथा न मांगे जाने पर भी उन्हें पवित्र अन्न देना चाहिए। जब वे सभी तृप्त हो जावें तब उन्हें मुँह धोने के लिए जल देना चाहिए। तदनन्तर, उन्हें अक्षत देकर कहना चाहिए कि भोजन कराने में हुई त्रुटियों को क्षमा कीजिए और इस पर कन्याओं को चाहिए कि वे भोजन-प्रदान करने वाले के सिर पर अक्षत डाल दें। और इसके बाद भोजन कराने वाला व्यक्ति उन्हें भक्ति-पूर्वक प्रणाम करे ।”

हे देवराज इंद्रा! देवी पुराण के अनुसार कन्याओं को दुर्गाष्टमी, नवमी के दिन भोजन कराना सर्वश्रेष्ठ माना गया है।इस तरह पूजन कराने से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं और सभी कामनाओं को परिपूर्ण करती हैं, इस पूजन के बाद ही भक्त का नवरात्र व्रत पूरा होता है इसीलिए कन्या भोज कराया जाता है

(Kanya Puja) कन्या पूजन में कन्याओं की उम्र?

कन्याओं की आयु दो वर्ष से ऊपर तथा 10 वर्ष तक होनी चाहिए और इनकी संख्या कम से कम 9 तो होनी ही चाहिए और एक बालक भी होना चाहिए जिसे हनुमानजी का रूप माना जाता है. यदि 9 से ज्यादा कन्या भोज पर आ रही है तो कोई आपत्ति नहीं है.

क्यों अंतिम दिन विधि- पूर्वक कन्या पूजन करना अति आवश्यक माना गया है?

इस परंपरा के पीछे मान्यता है यह कि देवी जब अपने लोक जाती हैं तो उन्हें घर की कन्या की तरह ही बिदा किया जाना चाहिए।

कन्याओं को भेंट में क्या दें?

  • अगर सामर्थ्य हो तो कन्याओं को लाल चुनर के साथ चूड़ियां भेंट में दें। उन्हें दुर्गा चालीसा की छोटी पुस्तकें भेंट करें।
  • इसके अलावा आज के समय के हिसाब से आप कन्याओं को पेंसिल बॉक्स, टिफिन, वॉटर बोतल या फिर कलर पेन भी दे सकते हैं।

इस वर्ष (Navratri 2019) महाअष्टमी तिथि में कुमारी पूजन लाभदायक

महाअष्टमी 
5 अक्टूबर सुबह 09:53 बजे से अष्टमी आरम्भ
6 अक्टूबर सुबह 10:56 बजे तक
अष्टमी

महानवमी
6 अक्टूबर सुबह 10:56 बजे से महानवमी आरम्भ
7 अक्टूबर 12:38 PM तक महानवमी


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माँ दुर्गा आप सब की मनोकामनाएं पूरी करे। जय माता दी।

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