Govardhan Pooja, अन्नकूट: जाने क्यों इंद्र देव की बजाय गोवर्धन पर्वत की पूजा की जाती है?

Govardhan Puja

कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को गोवर्धन पूजा (Govardhan Pooja, अन्नकूट : गोवर्धन पूजा) का त्योहार मनाया जाता है। गोवर्धन पूजा का उत्सव मथुरा, वृन्दावन, गोकुल, काशी और नाथद्वार में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है।

इस दिन स्त्रियां गोबर की मूर्ति बनाकर भगवान की पूजा करती हैं।संध्या समय अन्नादिक का भोग लगाकर दीपदान करती हुई परिक्रमा करती हैं। तत्पश्चात्‌ उस पर गऊ का बास (वाधा) कुदाकर उसके उपले थापती हैं और बाकी को खेत आदि में गिरा देती हैं।

इसी दिन नवीन अन्न का भोजन बनाकर भगवान को भोग भी लगाया जाता है जिसे अन्नकूट कहते हैं।

गोवर्धन पूजा की कहानी

द्वापर युग में बृज में इंद्र की पूजा की जाती थी। लेकिन श्री कृष्ण ने ब्रजवासियों से कहा कि हमें इंद्र की पूजा करके कोई लाभ नही होता। वर्षा करना तो उनका कर्म और दायित्व है और वह सिर्फ अपना कर्म कर रहे हैं।

लेकिन गोवर्धन पर्वत हमारी गायों का संरक्षण और भोजन उपलब्ध कराते हैं। इसलिए हमें इंद्र देव की जगह गोवर्धन पर्वत की पूजा करनी चाहिए।श्री कृष्ण की बात को समझते हुए सभी ने गोवर्धन पर्वत की पूजा करनी शुरु कर दी।

जिससे इंद्र देव क्रोधित हो उठे और मेघों को आदेश दिया की गोकुल का विनाश कर दो। इसके बाद गोकुल में भारी बारिश होने लगी। भगवान श्री कृष्ण ने सभी गोकुल वासियों को गोवर्धन पर्वत के संरक्षण में चलने के लिए कहा।

जिसके बाद श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी हाथ की सबसे छोटी उंगली पर उठा लिया और सभी ब्रजवासियों की इंद्र के प्रकोप से रक्षा की।

इंद्र ने अपने पूरे बल का प्रयोग किया लेकिन उनकी एक न चली। लेकिन जब इंद्र को ज्ञात हुआ कि भगवान श्री कृष्ण विष्णु भगवान का ही अवतार हैं तो उन्हें अपनी भूल का अहसास हुआ और वह भगवान श्री कृष्ण से क्षमा मांगने लगे।

तब ही से सभी इंद्र देव की बजाय गोवर्धन पर्वत की पूजा की जाती है।


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