Diwali Ki Katha: क्यों की जाती है दिवाली के दिन लक्ष्मी पूजन के साथ अन्य देवताओं की पूजन

Diwali Ki Katha: क्यों की जाती है दिवाली के दिन लक्ष्मी पूजन के साथ अन्य देवताओं की पूजन

Diwali Ki Katha: दिवाली की कथा

एक बार शौनकादि ऋषियों ने सनतकुमार जी से पूछा- ” भगवन्‌! दीपमालिकोत्सव (दीपावली) के अवसर पर श्री लक्ष्मी जी के साथ-साथ अन्य देवी-देवताओं का पूजन क्यों किया जाता है, जबकि दीपावली का पर्व विशेषतः लक्ष्मी पूजन का है?”

ऋषियों की इस शंका को सुनकर सनतकुमार जी कहने लगे- ”हे ऋषियो! जब दैत्यराज बलि ने अपने भुजबल से अनेक देवताओं को बंदी बना लिया तो कार्तिक अमावस्या के दिन स्वयं विष्णु भगवान ने वामन रूप धारण करके उसे बांध लिया और समस्त बंदी बनाए गए देवताओं को कारागार से मुक्त करा दिया।

कारागार से मुक्त होकर सभी प्रमुख देवों ने क्षीर सागर में लक्ष्मी सहित विश्राम किया। इसी कारण दीपावली के दिन लक्ष्मी पूजन के साथ-साथ अन्य देवताओं के भी पूजन व शयन की व्यवस्था करनी चाहिए। ऐसा करने से लक्ष्मी अन्य देवताओं के साथ वहीं विश्राम करेंगी।

लक्ष्मी जी तथा देवताओं के शयन के लिए ऐसी शय्या बिछानी चाहिए जिसको किसी प्राणी के लिए न प्रयोग किया गया हो। उस शय्या पर सुंदर-नवीन वस्त्र व चादर बिछाकर तकिया-रजाई आदि लगा दें। तत्पश्चात्‌ सुगन्धित कमल पुष्प भी शय्या पर बिछायें, क्योंकि लक्ष्मी जी का निवास प्राय: कमल में रहता है।

हे ऋषियो! इस प्रकार विधिपूर्वक श्रद्धायुक्त होकर देवताओं व भगवती लक्ष्मी के पूजन से वें स्थायी निवास करती हैं। भगवती लक्ष्मी के भोग के लिए मोदक (लड॒डू) बनाने चाहिए। जो गाय के दूध के खोये (मावा) व मिश्री से बने हों।

आप पढ़ रहे हैं: Diwali Ki Katha

यह दिवाली की पहली कथा थी दूसरी कथा पढ़ने के लिए निचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें। यूँ तो कई कथाएं प्रचलित हैं लेकिन सबका मूल एक ही है।

इस वेबसाइट को और अच्छा बनाने के लिए हमे अपने सुझाव जरूर दें।

https://karmachakra.com/diwali-vrat-katha-hindi

Is tarah se karen diwali Pujan-

https://karmachakra.com/laxmi-pujan-vidhi-hindi
परिवार एवं मित्रों के साथ शेयर करें -

Leave a Reply

Your email address will not be published.