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श्री राम कथा

Bhagwan Raam se Jude aise tathya jo apko jeena sikha de| जानिए भगवान राम से जुड़े ऐसे तथ्य जो आपको जीना सीखा दें।

(Bhagwan Raam se Jude aise tathya jo apko jeena sikha de)
यूँ तो रामायण की कथा हमें बहुत कुछ सिखाती है। पर भगवान राम के इन गुणों को हम अपने जीवन में भी अपना सकते है।

अपने जीवनसाथी के प्रति वफादारी

ऐसा कुछ भी नहीं था जो भगवान राम ने अपनी पत्नी सीता मैय्या को रावण के चंगुल से मुक्त करने के लिए नहीं किया था। जब भगवान राम चौदह साल के बाद अयोध्या वापस लौटे और सिंहासन स्वीकार किया, उन्होंने माँ सीता से पूरे राज्य के सामने अपनी शुद्धता और पवित्रता साबित करने के लिए कहा।

इससे माँ सीता को गहरी चोट लगी और वह जमीन के अंदर गायब हो गई। इस घटना से भगवान राम को बहुत निराशा हुई लेकिन इसके बाद भी वे अकेले ही रहे और किसी अन्य महिला से शादी नहीं की। भगवान राम अपने विवाह के लिए वफादार रहे और ‘धर्म’ के सभी नियमों का पालन करते हुए राज्य की सेवा की।

दया

Bhagwan Raam se Jude aise tathya jo apko jeena sikha de)
(Bhagwan Raam se Jude aise tathya jo apko jeena sikha de)

रामायण में एक उदाहरण है जहां पूरी वानरसेना लंका तक पहुंचने के लिए पुल का निर्माण करने में व्यस्त थी। यहां भगवान राम एक छोटे से गिलहरी को देखते हैं जो पत्थर को खींचने का प्रयत्न करती है और इस प्रक्रिया में योगदान करने के लिए कड़ी मेहनत कर रही है।

भगवन राम ने नन्ही गिलहरी को अपने हाथों में लिया और उसे थपथपाया। उस नन्ही सी गिलहरी के प्रयासों की सराहना की। ऐसी दयाभावना हम सब मनुष्यों में होनी चाइये।

कई बार विजय के लिए पूल के निर्माण की आवश्यकता होती है

(Bhagwan Raam se Jude aise tathya jo apko jeena sikha de)

भगवान राम ने रावण के खिलाफ युद्ध जीता क्योंकि उन्होंने पुल का निर्माण किया और लंका जा कर युद्ध किया। वेह माँ सीता को रावण के चंगुल से बचाने के अन्य तरीके भी आजमा सकते थे लेकिन उन्होंने खुद जाने का विकल्प चुना। यह प्रभु राम के जीवन से प्रेरित जीवन का सबक है जो हमें सीखना चाहिए।

हमें कई बार कठिन परिश्रम से विजय की ओर पूल का निर्माण करना चाइये। इसी रवैये से हम जीवन की सभी लड़ाइयों को जीत पाएंगे।

विनम्रता

(Bhagwan Raam se Jude aise tathya jo apko jeena sikha de)

जब भगवान राम(Bhagwan Ram) को वनवास मिला और वह जंगलों को में रह रहे थे, तो एक दिन उन्हें शबरी नामक एक बूढ़ी महिला द्वारा बेर चढ़ाये गए। उसने भगवन राम को वे बेर दिए जो उसने पहले ही चख लिए थे।

उसके बाद भी भगवान राम जो की एक राजकुमार थे, उन्हें खाने में कोई संकोच नहीं हुआ। ऐसा इसलिए था क्योंकि वह एक दयालु और विनम्र व्यक्ति थे। उन्होंने शबरी की भावना को देखा।

हमें रामायण से मिली समझदारी को जीवन में अपनाना चाइये और धर्म की शिक्षाओं का पूरी क्षमता से पालन करना चाहिए।

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https://karmachakra.com/hanumanji-ko-laal-sindoor-kyo-lagate-hai

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