Ahoi Ashtami Vrat Vidhi: संतान की उन्नति और प्रगति के लिए इस तरह करें पूजन

Ahoi Ashtami Vrat Vidhi: संतान की उन्नति और प्रगति के लिए व्रत विधि

Ahoi Ashtami Vrat Vidhi

अहोई अष्टमी का व्रत संतान की उन्नति, प्रगति और दीर्घायु के लिए होता है। यह व्रत कार्तिक कृष्ण पक्ष की अष्टमी को किया जाता है। जिस दिन (वार) की दीपावली होती है, उससे ठीक एक सप्ताह पूर्व उसी दिन (वार) को अहोई अष्टमी पड़ती है।

पूजा का समय- 21 अक्टूबर 2019 को शाम 05:45 बजे से 07:02 बजे तक
तारों के दिखने का समय- शाम 06:10 बजे
चंद्रोदय- 21 अक्टूबर 2019 को रात्रि 11:46
अष्टमी तिथि प्रारम्भ- 21 अक्टूबर 2019 को प्रातः 6:44 बजे
अष्टमी तिथि समाप्त- 22 अक्टूबर 2019 को प्रातः 5:25 बजे

पूजन विधि(Ahoi Ashtami Vrat Vidhi)

व्रत करने वाली स्त्री को इस दिन उपवास रखना चाहिए। सायंकाल दीवार पर अष्ट कोष्ठक को अहोई की पुतली रंग भरकर बनाएं । पुतली के पास सेई व सेई के बच्चे भी बनाएं । चाहें तो बना-बनाया चार्ट बाजार से खरीद सकती हैं।

सूर्यास्त के बाद तारे निकलने पर अहोई माता की पूजा प्रारम्भ करने से पूर्व जमीन को साफ करें। फिर चौक पूरकर, एक लोटे में जल भरकर एक पटरे पर कलश की तरह रखकर पूजा करें।

पूजा के लिए माताएं पहले से चांदी का एक अहोई या स्याऊ और चांदी के दो मोती बनवाकर डोरी में डलवा लें। फिर रोली, चावल व दूध-भात से अहोई का पूजन करें। जल से भरे लोटे पर स्वास्तिक बना लें।

एक कटोरी में हलवा तथा सामर्थ्यानुसार रुपए का बायना निकालकर रख लें और हाथ में सात दाने गेहूं लेकर कथा सुनें। कथा सुनने के बाद अहोई की माला ‘गले में पहन लें और जो बायना निकाला था, उसे सासूजी का चरण स्पर्श कर उन्हें दे दें।

इसके बाद चन्द्रमा को अर्घ्य देकर भोजन करें। दीपावली के पश्चात्‌ किसी शुभ दिन अहोई को गले से उतारकर उसका गुड़ से भोग लगाएं और जल के छींटे देकर आदर सहित स्वच्छ स्थान पर रख दें।

जितने बेटे अविवाहित हों, उतनी बार 1 -1 तथा जितने बेटों का विवाह हो गया हो, उतनी बार 2-2 चांदी के दाने अहोई में डालती जाएं। ऐसा करने से अहोई देवी प्रसन्‍न होकर बेटों की दीर्घायु करके घर में मंगल करती हैं। इस दिन ब्राह्मणों को पेठा दान करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।

अहोई व्रत का उजमन(उद्यापन)

जिस स्त्री के बेटा अथवा बेटे का विवाह हुआ हो, उसे अहोई माता का उजमन करना चाहिए। एक थाल में चार-चार पूड़ियाँ सात जगह रखें। फिर उन पर थोड़ा-थोड़ा हलवा रख दें।

थाल में एक (साड़ी, ब्लाउज) और सामर्थ्यानुसार रूपए रखकर, थाल के चारों ओर हाथ फेरकर सासूजी के चरण स्पर्श करें तथा उसे सादर उन्हें दे दें। सासूजी तीयल(साड़ी, ब्लाउज) व रुपए स्वयं रख लें एवं हलवा-पूड़ी प्रसाद के रूप में बांट दें। हलवा-पूड़ी का बायना बहन-बेटी के यहां भी भेजना चाहिए।

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